Monday, October 26, 2015

रिफिल लेते समय रखें ख्याल कही आपका गैस सिलेंडर फटने वाला तो नहीं।

Doston Ish post ko jarur padhy...
L.P.G.गैस सिलेण्डर की भी "एक्सपायरी डेट" होती है।
एक्सपायरी डेट निकलने के बाद गैस सिलेण्डर को इस्तेमाल करना बम की तरह खरतनाक हो सकता है। आमतौर पर गैस सिलेण्डर की रिफील लेते समय उपभोक्ताओं का ध्यान इसके वजन और सील पर ही होता है।
उन्हें सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट की जानकारी ही नहीं होती।
इसी का फायदा एलपीजी की आपूर्ति करने वाली कंपनियां उठाती हैं और धड़ल्ले से एक्पायरी डेट वाले सिलेण्डर रिफील कर हमारे घरों तक पहुंचाती हैं।
यहीं कारण है कि गैस सिलेण्डरों से हादसे होते हैं।
~कैसे पता करें एक्सपायरी डेट~
सिलेण्डर के उपरी भाग पर उसे पकड़ने के लिए गोल रिंग होती है और इसके नीचे तीन पट्टियों में से एक पर काले रंग से सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट अंकित होती है। इसके तहत अंग्रेजी में A, B, C तथा D अक्षर अंकित होते है तथा साथ में दो अंक लिखे होते हैं।
A अक्षर साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च),
B साल की दूसरी तिमाही (अप्रेल से जून),
C साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितम्बर)
तथा
D साल की चौथी तिमाही अर्थात अक्टूबर से दिसंबर को दर्शाते हैं।
इसके बाद लिखे हुए दो अंक एक्सपायरी वर्ष को संकेत करते हैं।
यानि यदि सिलेण्डर पर A 11 लिखा हुआ हो तो सिलेण्डर
की एक्सपायरी मार्च 2011 है। इस सिलेण्डर का "मार्च 2011" के बाद उपयोग करना खतरनाक होता है।
इस प्रकार के सिलेण्डर बम की तरह कभी भी फट सकते हैं।
ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे इस प्रकार के
एक्सपायर सिलेण्डरों को लेने से मना कर दें तथा आपूर्तिकर्त्ता एजेंसी को इस बारे में सूचित करें !
(एक्शन फॉर सोशल एन्ड ह्यूमन एडवांसमेंट द्वारा जनहित में जारी)
Note : कृप्या घरेलू सुरक्षा के मद्देनजर इस पोस्ट को अधिक-अधिक शेयर करे !

हकीम दानिश

Monday, August 17, 2015

बेहतरीन मेसेज

बेहतरीन मेसेज

इस मैसेज को गौर से दो बार पढे !

जिस दिन हमारी मोत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रहा जाता है।
*
जब हम जिंदा होते हैं तो हमें लगता है कि हमारे पास खच॔ करने को पया॔प्त धन नहीं है।
*
जब हम चले जाते है तब भी बहुत सा धन बिना खच॔ हुये बच जाता है।
*
एक चीनी बादशाह की मोत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डालर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नोकर से शादी कर ली। उस नोकर ने कहा -
"मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ अब समझ आया कि वो हमेशा मेरे लिये काम करता था।"

सीख?
ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अज॔न कि बजाय अधिक जिया जाय।
• अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• मँहगे फ़ोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है।
• मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
• आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
• पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
• 70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता

तो 30% का पूण॔ उपयोग कैसे हो
• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चैक अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• शक्तिशाली होने पर भी सरल रहेँ।
• धनी न होने पर भी परिपूण॔ रहें।

बेहतर जीवन जीयें !!!
💮💮💮💮
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को,
💮💮💮
भूल जाएं - अपनी नेकियों को,
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
💮💮💮
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
💮💮💮💮
यदि आपके फ्रिज में खाना है, बदन पर कपड़े हैं, घर के ऊपर छत है और सोने के लिये जगह है,
तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं

यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं
तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं

यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं
तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुशनसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें

जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं
बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों में है!!!

यदि आप मैसेज को वाकइ पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं
तो आप उन करोड़ों लोगों में खुशनसीब हैं जो देख नहीं सकते और पढ़ नहीं सकते

अगर आपको यह सन्देश बार बार मिले तो परेशान होनेकी
बजाय आपको खुश होना चाहिए !

धन्यवाद...

मैंने भेज दिया
अब आपकी बाऱी है ।
नींद और मौत में क्या फर्क है...?
किसी ने क्या खूबसूरत जवाब दिया है....

"नींद आधी मौत है"

और

"मौत मुकम्मल नींद है"

जिंदगी तो अपने ही तरीके से चलती है....

औरों के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं।

सुबहे होती है , शाम होती है

उम्र यू ही तमाम होती है ।

कोई रो कर दिल बहलाता है

और

कोई हँस कर दर्द छुपाता है.

क्या करामात है कुदरत की,

ज़िंदा इंसान पानी में डूब जाता है

और मुर्दा तैर के दिखाता है...

बस के कंडक्टर सी हो गयी है
जिंदगी ।

सफ़र भी रोज़ का है और
जाना भी कही नहीं।.....

सफलता के सात भेद, मुझे अपने कमरे के अंदर
ही उत्तर मिल गये !

छत ने कहा : ऊँचे उद्देश्य रखो !

पंखे ने कहा : ठन्डे रहो !

घडी ने कहा : हर मिनट कीमती है !

शीशे ने कहा : कुछ करने से पहले अपने अंदर झांक
लो !

खिड़की ने कहा : दुनिया को देखो !

कैलेंडर ने कहा : Up-to-date रहो !

दरवाजे ने कहा : अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के
लिए पूरा जोर लगाओ !

लकीरें भी बड़ी अजीब होती हैं------
माथे पर खिंच जाएँ तो किस्मत बना देती हैं

जमीन पर खिंच जाएँ तो सरहदें बना देती हैं

खाल पर खिंच जाएँ तो खून ही निकाल देती हैं

और रिश्तों पर खिंच जाएँ तो दीवार बना देती हैं..

एक रूपया एक लाख नहीं होता ,

मगर फिर भी एक रूपया एक लाख से निकल जाये तो वो लाख भी लाख नहीं रहता

हम आपके लाखों दोस्तों में बस वही एक रूपया हैं …

संभाल के रखनT , बाकी सब मोह माया है
. aaj good person missing day hai .....yeh sms apne life k sweet frnd ko send karo , mujhe bhi karna agr main hu to ? Agr 6 sms apko wapis aaye to u r so lucky..........
हकीम दानिश

Thursday, March 26, 2015

कुछ काम की बात हो जाये

कुछ काम की बात हो जाये

अस्सलामु अलैकुम भाईयो आज से फालतू की पोस्ट बंद बाकबोली बहुत हो गयी
अब कुछ काम की बात हो जाये तो बेहतर है बहुत टाइम से बहुत कुछ सुनता आ रहा हु अपने बारे में और लोगो के बारे में अब शुरू कर रहा हु आप सब की बातो से ही कुछ लोगो कोमुह तोड़ जवाब देना है जो हर बात में फालतू की बकबक करते है इस लिए अब कुछ पोस्ट बनाये है और लगातार बना रहा हु जिनको सही वक्त पर एक एक करके यहा शो करूँगा उम्मीद है जो कुछ लोग फालतू की बकबक करते है शायद उनमे से किसी एक दो के ही मुह बंद हो जाये तो मेरा मकसद कामयाब हो जायेगा।  तो इस मकसद से पहली पोस्ट आज ही करूँगा फिर जो आपका जवाब होगा उन सब जवाब को इखट्टा कर के उस पोस्ट को कम्प्लीट करूँगा मुझे पता है उसमे वक्त लगेगा पर ऐसा करना ज़रूर है अब बहुत हो गया बर्दास्त के बाहर है हकीम दानिश खैर आप सब को जुमा मुबारक

कुछ काम की बात हो जाये

कुछ काम की बात हो जाये

एक बात पता करनी थी आप से एक शख्श मस्जिद गया छोड़ो किसी पे क्यों अपने ऊपर कहता हु में मस्जिद गया वह जा कर मेने बुजु किया सफ पे जा के खड़ा हुआ कानो तक हाथ उठाये फिर नाफ के पास बांध लिए जौसे हम नमाज़ में बांधते है फिर कुछ देर खड़ा रहने के बाद हाथ घुटनो पे ले गया जैसे हम रूकू में जाते है फिर खड़ा हुआ फिर सजदा किया फिर खड़ा हुआ
दूसरी रकअत में भी ऐसा ही किया ऐसे ही चार रकअत पूरी की लेकिन उस पूरी चार रकअत में मेने बिस्मिल्लाह तक नहीं पड़ी न ही नियत की न ही सुब्हाना पडा जब रूकू में गया तो रूकू की आयत नहीं पढ़ी सज़दे में भी ऐसा ही किया न अतताहीआतु नहीं दुरुद न ही सलाम फेरने पर जो पड़ते है वो पढ़ा
जबकि मुझे सब कुछ मालुम था कहा क्या पड़ते है फिर भी नहीं पड़ा एक अलिफ़ भी नहीं पड़ा
अब आप से मेरा सवाल क्या मेरी नमाज़ हो गयी या नहीं जहा तक मेरा ख्याल है नहीं होगी फिर भी आप से जवाब मांग रहा हु और आपके कॉमेंट का स्क्रीन शाट ले कर अपनी पोस्ट में इस्तेमाल करूँगा इसलिए सोच समझ के जावाब देना
आप सबका सही जवाब आएगा जवाब फिर में आगे की पोस्ट तैयार करूँगा
हकीम दानिश